रामदाना : पहाड़ का प्राचीन सुपरफूड
हिमालय की गोद में, जहां सर्द हवाएं चूल्हे की लपटों से लिपटती हैं, वहां उगता है एक छोटा-सा दाना — रामदानापौराणिक कथा और सांस्कृतिक विरासत
भुने रामदाने को तिल और गुड़ के साथ मिलाकर खाएं। पहाड़ी गाय का धारोष्ण (ताज़ा-गुनगुना) दूध डालकर खाएं तो अलौकिक स्वाद मिलता है।
दिनेश कुकरेती
कहते हैं, जब भगवान श्रीराम वनवास के दौरान वन-वन भटक रहे थे, तब उन्होंने इसी रामदाने को फलाहार के रूप में ग्रहण किया था। इसी वजह से इसका नाम पड़ा — रामदाना। उत्तराखंड के गढ़वाल में इसे मारसा और कुमाऊं में चुआ कहते हैं। मैदानी इलाकों में यह चौलाई के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्र के नौ दिनों में आज भी लाखों व्रती रामदाने की रोटी, खीर और हलवे से अपना उपवास तोड़ते हैं। यह कोई साधारण अनाज नहीं है। इसे दुनिया के सबसे प्राचीन खाद्यान्नों में से एक माना जाता है।मुंह में मिठास घोलने वाली रोटीरामदाना की रोटी खाते ही मुंह में एक अनोखी मिठास फैल जाती है। लेकिन इसका आटा चिपचिपा होने के कारण अकेले रोटी बनाना थोड़ा मुश्किल होता है। इसलिए पहाड़ी लोग इसे मंडुवा या गेहूं के आटे के साथ मिलाकर पिसवाते हैं। यह मिश्रित रोटी न सिर्फ स्वादिष्ट होती है, बल्कि बेहद पौष्टिक और पाचक भी। आप इसे सादा खाएं, हरे रामदाने के साग के साथ, कढ़ी के साथ या फिर दही के साथ — हर रूप में यह राज करता है।पोषण का खजानापौष्टिकता में रामदाना कई बड़े अनाजों को पीछे छोड़ देता है:- गेहूं के आटे से दस गुना ज्यादा कैल्शियम
- तीन गुना ज्यादा वसा
- दोगुना से अधिक लोहा
भुने रामदाने को तिल और गुड़ के साथ मिलाकर खाएं। पहाड़ी गाय का धारोष्ण (ताज़ा-गुनगुना) दूध डालकर खाएं तो अलौकिक स्वाद मिलता है।
2. म्यूजली
भुना रामदाना + शहद + बादाम + अखरोट + किशमिश + सिरोला। नाश्ते में यह म्यूजली न सिर्फ स्वादिष्ट है, बल्कि कैंसर रोधी गुणों से भी भरपूर मानी जाती है।
भुना रामदाना + शहद + बादाम + अखरोट + किशमिश + सिरोला। नाश्ते में यह म्यूजली न सिर्फ स्वादिष्ट है, बल्कि कैंसर रोधी गुणों से भी भरपूर मानी जाती है।
3. रामदाना के लड्डू
गुड़ की चासनी में भुना रामदाना और तिल मिलाकर बनाए गए लड्डू — स्वाद और स्वास्थ्य का कमाल का संगम।
गुड़ की चासनी में भुना रामदाना और तिल मिलाकर बनाए गए लड्डू — स्वाद और स्वास्थ्य का कमाल का संगम।
4. लसपसी रामदाना खीर
दूध, काजू, इलायची और रामदाना से बनी यह खीर इतनी स्वादिष्ट होती है कि एक बार खाई तो बार-बार याद आती है।
दूध, काजू, इलायची और रामदाना से बनी यह खीर इतनी स्वादिष्ट होती है कि एक बार खाई तो बार-बार याद आती है।
5. साबुत रामदाना का हलुवा
देसी घी, गुड़, नारियल और किशमिश के साथ बना हलुवा — नाश्ते में भी और प्रसाद में भी बेमिसाल।आजकल तो लोग रामदाने के आटे से बिस्कुट, केक, पूरी, बर्फी, शक्करपारा और पारिज भी बनाने लगे हैं। बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
देसी घी, गुड़, नारियल और किशमिश के साथ बना हलुवा — नाश्ते में भी और प्रसाद में भी बेमिसाल।आजकल तो लोग रामदाने के आटे से बिस्कुट, केक, पूरी, बर्फी, शक्करपारा और पारिज भी बनाने लगे हैं। बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
रामदाना सिर्फ एक अनाज नहीं, बल्कि पहाड़ की मिट्टी की देन, प्राचीन परंपरा और आधुनिक स्वास्थ्य का अनोखा संगम है। जो एक बार इसे खा लेता है, वह सिर्फ पेट नहीं, बल्कि अपनी जड़ों को भी महसूस कर लेता है।







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