आइए! 'तिलिस्मी ट्रेक' ड्याली सेरा की सैर करें
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चमोली जिले के ज्योतिर्मठ विकासखंड में 11,808 से 12,267 फीट तक की ऊंचाई पर स्थित है ड्याली सेरा बुग्याल, धान के खेत हैं इस बुग्याल का खास आकर्षण
दिनेश कुकरेती
उत्तराखंड में ऐसे कई अनछुए पर्यटन स्थल और ट्रेक रूट हैं, जिन पर आज तक देश-दुनिया के पर्यटकों की नजर नहीं पड़ी। जबकि, ये स्थल इतने खूबसूरत हैं कि एक बार जाने के बाद बार-बार इनकी सैर को मन करता है। इन्हीं में एक है चमोली जिले के ज्योतिर्मठ विकासखंड में स्थित ड्याली सेरा ट्रेक (Dyalishera Trek), जिसे उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (यूटीडीबी) ने ‘ट्रेक ऑफ द ईयर 2026’ घोषित किया है। उत्तराखंड हिमालय के गढ़वाल क्षेत्र में 11,808 से 12,267 फीट तक की ऊंचाई पर प्रसिद्ध कुंवारी पास और पंगारचूल्हा पीक रूट के पास पड़ने वाला यह ट्रेक लगभग 22 किमी लंबा है। अपनी रहस्यमयी खूबसूरती के कारण इसे 'तिलिस्मी ट्रेक' के नाम से भी जाना जाता है। इस ट्रेक पर ड्याली बुग्याल (अल्पाइन घास का मैदान), घने जंगल, खूबसूरत घाटियां, धान के खेत और हनुमान ताल आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं।
ड्याली सेरा में एक सितंबर 'ट्रेक ऑफ द ईयर-2026' के तहत विशेष ट्रैकिंग अभियान शुरू हो चुका है, जो कि 30 मार्च 2027 तक चलेगा । इसके तहत पहले आने वाले 300 ट्रेकर्स को प्रति व्यक्ति ₹2,000 की सब्सिडी दी जा रही है। यह सब्सिडी पर्यटन विभाग में पंजीकृत स्थानीय टूर ऑपरेटरों के माध्यम से 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर मिल रही है। ड्याली सेरा को पर्यटन मानचित्र पर लाने से स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस नए ट्रेकिंग रूट के विकसित होने से पहले से अत्यधिक व्यस्त रहने वाले कुंवारी पास ट्रेक पर मानवीय दबाव को कम करने में भी मदद मिलेगी।
मन मोह लेता है ड्याली बुग्याल
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इस ट्रेक का सबसे खूबसूरत पड़ाव है ड्याली बुग्याल (Alpine Meadows)। जब आप पेड़ों की कतार (Tree Line) को पार करते हैं तो मखमली हरी घास के विशाल मैदान आपका स्वागत करते हैं। सर्दियों में ये मैदान पूरी तरह बर्फ की सफेद चादर ओढ़ लेते हैं। यहां से नंदा देवी, द्रोणागिरी, हाथी-घोड़ा पर्वत और चौखंभा जैसी प्रसिद्ध पर्वत चोटियों के भव्य एवं स्पष्ट दर्शन होते हैं।
जैव विविधता के दर्शनP
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इस ट्रेक पर घने जंगल और जैव विविधता के दर्शन होते हैं। यह मार्ग ओक (Oak) और बुरांश (Rhododendron) के घने जंगल से होकर गुजरता है। ट्रेक पर आप हिमालयन थार और उत्तराखंड के राज्य पक्षी मोनाल का भी आसानी से दीदार कर सकते हैं।
आध्यात्मिक अनुभूति कराता है हनुमान ताल
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ड्याली सेरा से पहले रास्ते में पवित्र हनुमान ताल पड़ता है। घने जंगल, मखमली घास के मैदान (बुग्याल) और पंगारचूल्हा (Pangarchulla) व कुंवारी पास (Kuari Pass) क्षेत्र से घिरा यह एक शांत एवं पवित्र उच्च पर्वतीय ताल है, जो इसके आध्यात्मिक महत्व को बढ़ाता है। हनुमान ताल के किनारे कैंपिंग करना और सुबह के समय इसकी शांति को महसूस करना किसी आध्यात्मिक अनुभव से कम नहीं है।
अनोखा 'डिंगा सेरा' और भूम्याल देवता
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ग्रामीणों की मान्यता है कि प्राचीन काल में इस ऊंचाई पर स्वयं देवता धान की खेती करते थे। सेरा का अर्थ धान का खेत होता है। सेरे के पास ही भूम्याल देवता (क्षेत्रपाल) का मंदिर है, जहां क्षेत्र के लोग आज भी प्रकृति की रक्षा के लिए विशेष पूजा करते हैं।
नए ट्रेकर्स और अनुभवी लोगों के लिए सबसे उपयुक्त
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आसान से मध्यम (Easy-Moderate) श्रेणी का 22 से 25 किमी (आना-जाना) लंबा यह ट्रेक नए ट्रेकर्स (Fit Beginners) और अनुभवी लोगों, दोनों के लिए उपयुक्त है। ट्रेक की अवधि (Duration) पांच दिन और चार रातें (ऋषिकेश-हरिद्वार से शुरू और समाप्त) है। ट्रेकिंग का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जुलाई और सितंबर से दिसंबर के बीच का है।
पर्याप्त गर्म कपड़े और जरूरी दवाएं अवश्य साथ रखें
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यह एक उच्च पर्वतीय ट्रेक है। सर्दियों के अभियान (दिसंबर से मार्च) के दौरान यहां का तापमान काफी गिर जाता है। इस अवधि में आने वाले ट्रेकर्स कम से कम तीन से चार लेयर वाले गर्म कपड़े (थर्मल इनर, फ्लीस जैकेट, डाउन जैकेट), अच्छी ग्रिप वाले और वाटरप्रूफ ट्रेकिंग शूज, ट्रेकिंग पोल (Trekking Pole), हेडलैंप या टॉर्च, यूवी प्रोटेक्टेड सनग्लासेस और ऊंचाई पर होने वाली बीमारी (Acute Mountain Sickness - AMS) के लिए जरूरी दवाएं अवश्य साथ रखें।
ऐसे पहुंचें
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ड्याली सेरा की ट्रेकिंग के लिए हरिद्वार या ऋषिकेश से ज्योतिर्मठ पहुंचना पड़ता है। यहां से 16 किमी दूर कारछो गांव पड़ता है, जो सड़क से जुड़ा हुआ है। यहां पर्याप्त संख्या में होटल व होमस्टे उपलब्ध हैं। कारछो से ही यह ट्रेक शुरू होता है, जहां से डोबरिया कैंप (Dobriya Camp) छह किमी दूर पड़ता है। डोबरिया कैंप से ड्याली सेरा समिट (Dyalishera Summit) और वापसी ट्रेक दूरी आठ किमी है। फिर नीचे की ओर डोबरिया से कारछो लौटते हुए आठ से दस किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। इसके बाद ट्रेकर्स ज्योतिर्मठ लौटकर ऋषिकेश या हरिद्वार के लिए विदाई लेते हैं। कुछ एडवेंचर ऑपरेटर इस ट्रेक को थोड़ा और आगे बढ़ाकर इसके पास स्थित प्रसिद्ध पंगार चूल्हा पीक (Pangarchulla Peak) के साथ जोड़कर छह दिन का कंबाइंड ट्रेक भी कराते हैं।































