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मुझे अतिप्रिय है गणित, गणितज्ञों ने दी दुनिया को नई दृष्टि
--------------------------------------------------------------दिनेश कुकरेती
मैं गणित का विद्यार्थी नहीं रहा, फिर भी मुझे गणित विषय अतिप्रिय है। मैं जानता हूं कि गणित के सूत्रों का दुनिया की तरक्की में बहुत बड़ा योगदान रहा है और हमेशा रहेगा। इसलिए छात्र जीवन में गणित का सीमित अध्ययन करने के बावजूद गणित के बारे में पढ़ने-जानने में मुझे बड़ा आनंद आता है। खासकर उन गणितज्ञों के बारे में, जिन्होंने अपने अध्ययन से दुनिया को नई दृष्टि दी। उन्होंने ही मुझे बताया कि गणित रूपी औजार हमारे जीवनभर काम आता है। फिर चाहे हम इंजीनियर बनें या डॉक्टर, व्यापारी बनें या लेखक, राजनेता बनें या कलाकार, गणित के बिना कहीं-न-कहीं अधूरे ही हैं। गणित एवं गणितज्ञों को जानने-समझने के बाद मेरी यह धारणा मजबूत हुई है कि गणित को समझने वाला ही दुनिया को अधिक स्पष्ट, अधिक व्यवस्थित व अधिक नियंत्रणयोग्य देख सकता है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि सिर्फ परीक्षा के लिए गणित पढ़ना भले ही बोरिंग लगे, लेकिन अगर गणित को सोचने का तरीका समझकर पढ़ा जाए तो यह जीवन का सबसे मूल्यवान विषय है।

यह मेरी खुशनसीबी ही है कि मुझे श्रीनिवास रामानुजन, आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, भास्कर प्रथम, भास्कराचार्य (भास्कर द्वितीय), सी. आर. राव, हरिश-चंद्र , माधव संगमग्राम, कार्ल फ्रेडरिक गॉस, सर आइजैक न्यूटन, लियोनार्ड यूलर, जोहान बर्नौली, डैनियल बर्नौली, जैकब बर्नौली, जोहान हेनरिक लैम्बर्ट, निकोलस बर्नौली, पॉल इसहाक बर्नेज़, निकोलस फाटियो डी डुइलियर, एंड्रियास स्पीसर, क्रिस्टीन रीड्टमैन, हेनरी फेहर, शकुन्तला देवी, जॉर्ज बूले, स्टीफन हॉकिंग, पियरे डी फ़र्मेट और पियरे-साइमन लाप्लास, कार्ल फ्रेडरिक गाउस, डेविड हिल्बर्ट, बर्नहार्ड रीमैन, जॉर्ज कैंटर, यूक्लिड, पाइथागोरस, आर्किमिडीज, मिलेटस के थेल्स, अरस्तू, डायोफैंटस, रने देकार्त, एरेटोस्थेनेज हिप्पार्कस, उमर खय्याम, मुहम्मद इब्न मूसा अल-ख्वारिज्मी, ग्रिगोरी पेरेलमैन, रिचर्ड फेनमैन जैसे तमाम गणितज्ञों को पढ़ने का मौका मिला। साथ ही मिला समाज को वैज्ञानिक दृष्टि से समझने का नजरिया भी। इसी की बदौलत मुझमें सही को सही और गलत को गलत कहने की सामर्थ्य एवं हिम्मत आई है।

तार्किक सोच का सबसे शुद्ध एवं शक्तिशाली रूप
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मेरी हमेशा दृढ़ मान्यता रही है कि हमें किसी न किसी रूप में गणित अवश्य पढ़नी चाहिए। फिर चाहे हम छात्र जीवन में किसी भी विषय के विद्यार्थी क्यों न रहे हों। गणित सिर्फ स्कूल का विषय नहीं, बल्कि तार्किक सोच का सबसे शुद्ध एवं शक्तिशाली रूप है। गणित हमें सिखाती है कि जटिल समस्या को छोटे-छोटे चरणों (हिस्सों) में तोड़कर कैसे हल किया जा सकता है। यह हमें Inductive और Deductive reasoning दोनों सिखाती है। कहने का मतलब पैटर्न से सामान्य नियम और नियम से विशिष्ट निष्कर्ष कैसे निकालना है, इसकी चाबी गणित के पास ही है। दुनिया की हर समस्या, चाहे वह व्यक्तिगत हो या सामाजिक, को हल करने के लिए यही कौशल चाहिए। जो व्यक्ति गणित समझता है, वह बिना घबराए धैर्यपूर्वक जटिल स्थितियों का सामना कर सकता है।
गणित नहीं समझेंगे तो सिर्फ 'उपभोक्ता' बनकर रह जाएंगे
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बात दैनिक जीवन की करें तो बजट बनाना, ब्याज की गणना, छूट निकालना, यात्रा की दूरी व समय की योजना बनाना, सब गणित ही तो है। अक्सर हम रसोई में अनुपात ( ratio ), दवा की खुराक, घर की मरम्मत में माप जैसे कार्य बिना गणित के अनुमान पर छोड़ देते हैं। जाहिर है इसका नतीजा भी अक्सर गलत साबित होता है। वर्तमान जीवन में स्टॉक मार्केट, ईएमआई, टैक्स, बीमा, ये सब कार्य गणितीय अवधारणाओं पर ही टिके हुए हैं। भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान, अर्थशास्त्र, कंप्यूटर साइंस जैसे सभी विषय गणित पर ही आधारित हैं। एआई, मशीन लर्निंग, क्रिप्टोग्राफी, मेडिकल इमेजिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, इनमें तो गणित के बिना एक पंक्ति कोड भी नहीं लिखा जा सकता। ऐसे में अगर हम गणित नहीं समझेंगे, तो हम सिर्फ 'उपभोक्ता' बनकर रह जाएंगे और कभी क्रिएटर (सृष्टा) नहीं बन पाएंगे।

आलोचनात्मक सोच विकसित करती है गणित
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मैं भलीभांति जानता हूं कि गणित में 'भावना' या 'राय' का कोई स्थान नहीं है। कोई भी कथन सही है तो उसका प्रमाण देना ही पड़ेगा। गणित हमें Critical thinking सिखाती है यानी हम में आलोचनात्मक सोच विकसित करती है। ताकि हम किसी भी जानकारी, विचार या स्थिति को बिना किसी पूर्वाग्रह के तर्क और विश्लेषण के साथ परख सकें। इसमें सच और झूठ के बीच का अंतर समझें और किसी भी विषय के सभी पहलुओं पर निष्पक्ष रूप से विचार कर सही निर्णय लें। दावों को बिना सोचे स्वीकार न करें, बल्कि उनके साक्ष्य मांगें। फेक न्यूज और गलत या भ्रामक आंकड़ों से बचने के लिए गणितीय समझ सबसे अच्छा हथियार है।
मस्तिष्क का गणित से बेहतर व्यायाम नहीं
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गणित का अध्ययन एक तरह से मस्तिष्क का व्यायाम है, जिसके दीर्घकालिक लाभ होते हैं। अध्ययन बताते हैं कि गणित पढ़ने से कार्यकारी कार्य (एग्जीक्यूटिव फंक्शन) जैसे- ध्यान केंद्रित रखना, योजना बनाना और लचीलापन सुधरता है। इसे आसान भाषा में हम मस्तिष्क का सीईओ कह सकते हैं, जो हमें विचारों को नियंत्रित कर सही निर्णय लेने और लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। गणित एक सार्वभौमिक भाषा है, जो संस्कृति, देश या भाषा की सीमा से ऊपर है। दुनिया के किसी भी कोने में 2+2 का योग हमेशा 4 ही रहेगा।

गणित का दुर्लभ फॉर्मूला
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इस सबके बावजूद आज तक मेरी समझ में गणित का यह दुर्लभ फॉर्मूला नहीं आ पाया, जो a+bײ×()² = a²+2ab+b² सिद्ध करता है। मुझे तो लगता है कि यह फार्मूला ही गलत है। हालांकि, जिसने यह फॉर्मूला दिया, वह निश्चित रूप से दुनिया का महान गणितज्ञ होगा। काश! मुझे इस गणितज्ञ के शोध-अध्ययन को पढ़ने का मौका मिल जाए तो स्वयं को धन्य समझूंगा। सुना है कि इसी महान गणितज्ञ ने दुनिया को 2+6=8 और 1+7=8, 1+1=2, लेकिन 1+1=11, A for America+I for India = AI और MAGA+MIGA =MEGA जैसे फॉर्मूले भी दिए हैं। इनका जीवन में क्या महत्व है, मैं स्वयं को यह बता पाने में सक्षम नहीं पाता। मुझे तो ये पारलौकिक फॉर्मूले लगते हैं। खैर! इन फॉर्मूलों को किनारे रख दें तो गणित पढ़ना 'क्या सोचना है' नहीं, बल्कि 'कैसे सोचना है' सिखाता है।

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