उत्तर भारत का इकलौता मंदिर, जहां भगवान शिव के साथ होती है राहु की पूजा, कोटद्वार से 142 और जिला मुख्यालय पौड़ी से 45 किमी की दूरी पर है पैठाणी
प्रकृति की खूबसूरत वादियों में करें पैठाणी के राहु मंदिर की सैर
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दिनेश कुकरेतीचलिए! आपको उत्तराखंड के एक ऐसे अद्भुत मंदिर की सैर कराएं, जहां असुर कहे जाने वाले छाया ग्रह राहु की पूजा होती है। पौड़ी जिले के थलीसैण ब्लाक की कंडारस्यूं पट्टी के पैठाणी गांव में स्योलीगाड व नावालिका नदी के संगम पर स्थित यह मंदिर अपने अनुपम वास्तु के लिए प्रसिद्ध है। यह उत्तराखंड का इकलौता मंदिर है, जहां भगवान शिव के साथ राहु की पूजा होती है। कहते हैं कि आदि शंकराचार्य ने अपनी हिमालय यात्रा के दौरान पैठाणी में राहु मंदिर का निर्माण करवाया था। पर्वतीय अंचल में स्थित यह मंदिर बेहद भव्य एवं खूबसूरत है। यहां आयोजित होने वाले भंडारे में श्रद्धालु मूंग की खिचड़ी को प्रसाद रूप में ग्रहण करते हैं।

‘राष्ट्रकूट’ से बना राठ, ‘पैठीनसि’ से पैठाणी
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‘स्कंद पुराण’ के केदारखंड में उल्लेख है कि राष्ट्रकूट पर्वत की तलहटी में स्योलीगाड व नावालिका नदी के संगम पर राहु ने भगवान शिव का घोर तप किया, जिस वजह से यहां राहु मंदिर की स्थापना हुई। राष्ट्रकूट पर्वत के नाम पर ही यह राठ क्षेत्र कहलाया और राहु के गोत्र ‘पैठीनसि’ के कारण इस गांव का नाम पैठाणी पड़ा।

आठवीं-नवीं सदी के बीच का है मंदिर
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वास्तु शिल्प एवं प्रतिमाओं की शैली के आधार पर पैठाणी का यह शिव मंदिर और प्रतिमाएं आठवीं-नवीं सदी के बीच के प्रतीत होते हैं। मंदिर की ऊपरी शिखा कुछ झुकी हुई प्रतीत होती है। गर्भगृह में भगवान शिव के साथ राहु की धड़विहीन मूर्ति विराजमान है और दीवारों के पत्थरों पर आकर्षक नक्काशी की गई है, जिनमें राहु के कटे सिर व सुदर्शन चक्र उत्कीर्ण हैं। मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है।

पश्चिमाभिमुखी मंदिर
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पत्थरों के ऊंचे चबूतरे पर बने मुख्य मंदिर के चारों कोनों में छोटे शिखर बने हैं। पश्चिम की ओर मुख वाले मुख्य मंदिर में वर्गाकार गर्भगृह के सामने मंडप बनाया गया है। उत्तर-पूर्वी व दक्षिण कर्ण प्रासादों की चंद्रालाओं (हवा-रोशनी के लिए बनी जालीदार सजावटी आकृतियां) के मध्य पत्थरों पर नक्काशी की गई है।

इन स्थलों की भी कर सकते हैं सैर
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पैठाणी से 50 किमी की दूरी पर थलीसैंण कस्बे की खूबसूरती भी देखने लायक है। यहां आप लोक संस्कृति के ठेठ पारंपरिक स्वरूप से परिचित हो सकते हैं। आप ऋषिकेश से पौड़ी होकर पैठाणी जा रहे हैं तो एक दिन रुककर पर्यटन नगरी पौड़ी की सुंदरता को अवश्य निहारें। इसी के साथ कोटद्वार-पौड़ी हाईवे पर स्वतंत्रता आंदोलन का गवाह रहा ऐतिहासिक नगर दुगड्डा व पहाड़ का जंक्शन सतपुली नगर भी आपका मन मोह लेगा। पौड़ी से 20 किमी दूर स्थित खिर्सू जैसे खूबसूरत पर्यटन स्थल के लिए भी वक्त निकाल लें तो सोने पे सुहागा।

ऐसे पहुंचें पैठाणी
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पैठाणी के लिए गढ़वाल के प्रवेशद्वार कोटद्वार से 142 किमी अथवा जिला मुख्यालय पौड़ी से 45 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। कोटद्वार से पौड़ी की दूरी 102 और ऋषिकेश से 113 किमी है। पौड़ी से ही पैठाणी का सफर शुरू होता है। दिल्ली समेत देश के अन्य स्थानों से ऋषिकेश व कोटद्वार तक रेल और जौलीग्रांट स्थित देहरादून एयरपोर्ट तक हवाई सुविधा उपलब्ध है।

खाने-ठहरने के पर्याप्त इंतजाम
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पैठाणी के लिए पौड़ी व कोटद्वार से सार्वजनिक वाहन सुविधा उपलब्ध है। आप यहां वर्षाकाल को छोड़कर कभी भी जा सकते हैं। पैठाणी के साथ ही रास्तेभर के हर पड़ाव पर खाने-ठहरने के पर्याप्त इंतजाम हैं। होमस्टे में आप पारंपरिक व्यजनों का लुत्फ भी ले सकते हैं।


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