| रामदाना : पहाड़ का प्राचीन सुपरफूड |
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| गढ़वाल के परमार राजवंश का गौरवशाली इतिहास समेटे है देवलगढ़ का किला |
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| The Unforgettable Experiences of Odisha Have Infused Body and Soul with Vitality |
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| तन-मन में स्फूर्ति भर गईं ओडिशा की अविस्मरणीय अनुभूतियां |
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| मशकबीन : स्कॉटलैंड की धुन, उत्तराखंड की आत्मा |
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| मुंह में मिठास और तन-मन में स्फूर्ति घोल देते हैं बुखणा |
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| होली का गढ़वाल जैसा आध्यात्मिक रूप कहीं नहीं |
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| राजवंशों के दौर में लोक का संदेशवाहक रहा है धतिया नगाड़ा |
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| El único ritual religioso del mundo que dura seis meses: el Mauri Mela de Tamlag |
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| गगवाड़स्यूं घाटी में छह माह चलने वाला दुनिया का अनूठा उत्सव तमलाग का मौरी मेला |
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| La celebración de la alegría colectiva del pueblo: Magh Maroj | | |
| लोक के सामूहिक आनंद का उत्सव माघ मरोज |
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| Hier thront der erste Badri, dieser Dham bezaubert das Herz |
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| यहां विराजते हैं प्रथम बदरी, मन मोह लेता है यह धाम | |
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| Der Pandaun-Tanz aus Uttarakhand ist einzigartig und unverwechselbar |
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| अनूठा और विलक्षण है उत्तराखंड का पंडौं नृत्य |
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| Kommen Sie! Begeben Sie sich auf eine Reise vom Boden in die Welt der Sterne |
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| आइये! जमीन से करें सितारों की दुनिया में सैर |
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| Die Chardham Yatra findet auch im Winter statt |
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| Die Türen von Badri-Kedar Dham sind im Urgam-Tal nie geschlossen |
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| झिलमिलाने लगे मंगल के दीप, बग्वाली उल्लास में थिरकने लगा लोक |
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| खत्म हो रही है धाराप्रवाह गढ़वाली-कुमाऊंनी बोलने वाली पीढ़ी |
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| उत्तराखंड के सपूत ने बनाई थी हमारे राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' की धुन |
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| चांचड़ी की धुन पर थिरकता है अखिल हिमालय |
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| आइये! फूलों की इस गुमनाम धरोहर से दुनिया को परिचित करायें |
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| धराली : जहां मलबे के सिवा कुछ नहीं बचा |
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| कल्प केदार : खुद में अनगिनत रहस्य समेटे है यह तीर्थ |
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| गढ़वाली-कुमौनी को सम्मान दिलाने का सुनहरा मौका |
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| कुल्हाड़ी के वार से खतरनाक शब्दों की धार |
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| 2013 की आपदा के बाद बदला चारधाम यात्रा का स्वरूप |
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| जीवन मूल्य, परंपरा व रीति-रिवाजों का प्रतिबिंब कला-संस्कृति |
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| प्रकृति प्रेमी व सैलानियों को कुदरत का अनुपम उपहार |
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| ऐसी घाटी, जहां कभी बंद नहीं होते बदरी-केदार के कपाट |
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| सीढ़ियों पर बसा उत्तराखंड का एक खूबसूरत शहर | | |
| हिमालय में भगवान विशाल बदरी के आठ धाम |
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| अनूठे हैं उर्गम घाटी के फ्यूंला नारायण |
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| बजरंगबली की पूजा की तो हुक्का-पानी बंद | | |
| कहानी : हम जरूर मिलेंगे |
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| जीवन की राहें-6 (आंदोलन ने दी लेखन को धार) |
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| गढ़वालियों का यरुशलम बना देहरादून |
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| हिमालय में मक्खन-मट्ठा की अनूठी होली |
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| प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण का पर्व हरेला |
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| पिंडालू के पत्यूड़ का जवाब नहीं |
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| जीवन की राहें-5 (अतीत पर गर्व की अनुभूति) |
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| जीवन की राहें-4 (कार्य अनेक, ध्येय एक) |
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| जीवन की राहें-3 (बढ़ने लगा अखबारों के प्रति आकर्षण) |
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| उर्गम के वंशी नारायण |
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| हिमालय में शीत केदार दर्शन | |
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| जीवन की राहें-2 ('सत्यपथ' से परिचय) |
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| जीवन की राहें-1 (किशोरवय के सपने) |
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| जीवन की राहें (भूमिका) |
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| कण्वाश्रम को नहीं मिल पाई आज तक उसकी पहचान |
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| हिमालय में बाबा केदार के चौदह स्वरूप |
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| शीतकाल में भी रुकती नहीं चारधाम यात्रा |
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| कला जगत को गढ़वाली शैली देने वाले मौलाराम |
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| इन्सान को कुत्ता बनने की शुभकामनाएं |
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| कुत्ते से ज्यादा खतरनाक है कुत्ता होना |
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| दूरदर्शन में मंगलेश दा पर चर्चा |
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| चेतना और संवेदना के कवि मंगलेश |
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| विज्ञान बनाम पाखंड |
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| इंसान की शक्ल देखने को तरस जाएगा पहाड़ |
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| ज्ञान का मूल |
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| व्हीटग्रास व मोरिंगा लीफ पाउडर | |
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| व्हीटग्रास से सपनों को आकार देता उद्यमी |
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| जेल के वो सात दिन |
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| विज्ञानकु और मैं |
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| रिश्तेदार | |
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| जोशीमठ और उदास वसंत | |
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| मेरी यादों में बसा है जोशीमठ |
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| उत्तराखंड आंदोलन के संस्मरणों का दस्तावेज |
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| हम कहां जा रहे हैं |
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| सिनेमा, मैं और मेरे दोस्त | |
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| सपने जो बिखर गए |
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| गढ़वाल पर प्रथम गोरखा आक्रमण का गवाह लंगूरगढ़ |
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| दून में बिखरे संस्कृति के रंग |
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| एक यादगार शाम, दोस्त के नाम |
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| दीपावली मनाने ऐसे पहुंचा कोटद्वार | |
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| त्याग, तपस्या एवं साहस की प्रतिमूर्ति गोकुल सिंह नेगी |
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| डायरी | |
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| यादगार जन्मदिन |
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| किताबों की बातें |
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| अग्नि दीक्षा | |
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| किताबों ने बदल दी जीवन की धारा |
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| सुनहरे दिन | |
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| वनवास, जो जारी है | |
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| ऐतिहासिक लालपुल |
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| कच्चे नारियल (Part-2) |
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| कच्चे नारियल (Part-1) | |
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| अमीन की खटिया (Part-3) |
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| अमीन की खटिया (Part-2) |
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| अमीन की खटिया (Part-1) | |
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| पत्थरों की बारिश |
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| नेगीदा के साथ एक दिन |
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| शरारती बचपन |
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| उमस भरी रातें | |
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| ऐसी थी मेरी नानी | |
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| नानी |
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| क्या ऐसे भी कोई जाता है | |
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| फूल संगरांद | |
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| रंगोत्सव | |
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| बर्फ की चादर ओढ़े हैं हिमालय के चारधाम |
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| किताबों की दुनिया |
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| बूस्टर डोज और कोरोना |
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| जीवन में बदलाव की ओर |
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| जंगल में गणतंत्र का उल्लास |
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| कड़वापानी वन विश्रामगृह |
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| नई सुबह की नई शुरुआत | |
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| प्रेस क्लब का चुनाव | |
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| नामांकन का दिन | |
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| सकारात्मक ऊर्जा की ओर |
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| नेचर पार्क की सैर |
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| प्रेस क्लब क्रिकेट टूर्नामेंट |
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| भगवान बदरी नारायण |
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| तीसरी दुनिया के रहस्य |
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| बाइक और मैं |
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| असमंजस |
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| बाल दिवस पर बिटिया का जन्मदिन |
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| तुम बहुत याद आओगे |
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| जन्मदिन का केक |
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| महादेवी पर परिचर्चा के बहाने |
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| चुनौती पर चुनौती |
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| महादेवी पर परिचर्चा में मितरों के साथ |
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| साहित्यकार मितरों से मिलने का मौका |
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| साहित्यिक बातचीत |
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| परेशानी वाला सफर |
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| आत्मीय मित्र से मुलाकात |
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| रक्षाबंधन |
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| रक्षा बंधन को लेकर उत्साह) |
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| All day rain/पूरे दिन की बारिश |
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| कोरवा से दून (भाग-चार) |
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| कोरवा की मनभावन शाम (भाग-तीन) |
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| झाझरा वन विश्राम गृह की यादगार पार्टी (भाग-दो) |
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| कोरवा भ्रमण की तैयारी (भाग-एक) |
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| Water in petrol tank | |
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| बरसात बढ़ा रही मुश्किलें |
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| बारिश के बीच दून वापसी |
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| गुड़ की मिठाई (यादें-तीन) |
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| गांव के सुनहरे पल (यादें-दो) |
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| हलुवा पार्टी यादें (1) | |
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| Returned home after four months |
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| Walking Tour from Dwarakhal to Dugadda |
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| देव पूजा की यादगार रात (भाग-बारह) |
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| पूजा की तैयारी |
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| Village tour after thirteen years |
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| मेरी मातृभाषा मेरा गौरव |
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| गांव की शादी और मैं (भाग-नौ) |
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| एक अनूठी शादी |
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| इसलिए खास है मेरा गांव |
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| जब मैंने पहली बार बस देखी |
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| Village's natural water streams |
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| मेरा विद्यालय (भाग-चार) |
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| मेरा विद्यालय (भाग-तीन) | |
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| मेरा विद्यालय (भाग-दो) |
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| गांव की यादें मेरी धरोहर हैं (भाग-एक) |
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| आभासी दुनिया के दोस्त और जन्मदिन | |
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| Today is my birthday and tomorrow is also | |
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| Engagement rasgullas and those two meetings |
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| Memorable engagement, memorable day |
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| Historic day of happiness |
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| वो पहली मुलाकात | |
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| यही तो जीवन का सुख है |
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| स्कूटी पंचर हो गई | |
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| Relief from paying rent | |
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| खास होती है महीने की पहली तारीख |
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| इन बातों पर भी ध्यान दीजिए |
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| thirteen years of exile |
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| सच पता चला तो मन को मिली शांति |
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| Effect of lockdown happening like this |
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| knowledge of corona era |
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| Trouble averted cheaply |
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| Engine oil leakage increased stress |
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| Corona will be defeated by rules and restraint |
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| Took second dose of covid vaccine |
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| Full payment done |
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| हल्का हो गया सिर का बोझ |
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| I am strong |
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| News from here and there |
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| Freedom from captivity |
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| रिपोर्ट नेगेटिव आने से मैं खुश हूं |
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| Today, Kovid test was conducted again |
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| Mind upheaval |
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| Boring day |
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| Now imprisoned in the house for three days |
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| Aries Sankranti : Main bath of Haridwar Kumbh |
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| View of Kumbh Nagri with bath |
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| First royal bath of Haridwar Kumbh |
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| Camped in Haridwar for Kumbh coverage |
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| Despite not wanting, now preparing to go to Kumbh |
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| First dose of Kovid vaccine |
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| Today's knowledge |
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| Party fun with friends |
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| Doon returned after six days |
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| Relaxing days at home |
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| Then the banks of the Yamuna |
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| Jhajra Rest House Party |
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| Memorable day of Makar Sankranti coverage |
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| For reporting in Haridwar |
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| Year of new expectations |
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| One day in the name of press club |
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| There is no time to eat or sleep |
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| Relaxed moments with family/परिवार के साथ सुकून के पल |
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| Meeting a literary friend/एक साहित्यकार मित्र से मुलाकात |
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| "Guldasta" in your hand/"गुलदस्ता" आपके हाथ में |
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| A month of stress/ तनावभरा एक माह |
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| Day of responsibility |
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| Always been fond of reading and writing |
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| Life is the name of being happy |
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| The bank of the Yamuna |
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| Planning of such a picnic |
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| Now he has also been recognized |
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| The mind gets lighter |
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| जल्दी उठो तो पढ़ने का वक्त मिल जाता है |
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| शायद यही प्यार है |
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| मेडिकल स्टोर और वो |
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| पूनम की दुकान |
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| वो और मैं |
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| अपनी बात | |
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